3 साल से सिर्फ आश्वासन! आखिर कब मिलेगा बनचौरा को उसका हक? अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लगाई गुहार
3 साल से सिर्फ आश्वासन! आखिर कब मिलेगा बनचौरा को उसका हक? अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लगाई गुहार
उत्तरकाशी। सीमांत क्षेत्र बनचौरा में स्थित अति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (APHC) बनचौरा दशगी हातड़ और उपली बिष्ट पट्टी समेत आसपास के कई गांवों की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। लेकिन विडंबना यह है कि वर्षों पुराना यह स्वास्थ्य केंद्र आज भी आधे-अधूरे स्टाफ के भरोसे संचालित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बनचौरा में तैनात दो नर्सों का वेतन अति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनचौरा के नाम से जारी होता है, लेकिन वे सीएचसी चिन्यालीसौड़ में कार्यरत हैं। वहीं, बनचौरा के लिए नियुक्त स्थायी चिकित्सक ने भी अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। यदि यह स्थिति सही है, तो सवाल उठता है कि आखिर सीमांत क्षेत्र की जनता को उसके हिस्से की स्वास्थ्य सेवाएं कब मिलेंगी?
गौरतलब है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) निरीक्षण के दौरान स्वयं कह चुके हैं कि बनचौरा स्वास्थ्य केंद्र में कम से कम दो डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन वर्षों बाद भी यह व्यवस्था धरातल पर दिखाई नहीं दे रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले को लेकर कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। इससे लोगों में गहरी नाराज़गी है।
अब क्षेत्र की जनता ने सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। लोगों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में सीमांत क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के अपने संकल्प पर गंभीर है, तो बनचौरा स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जाना चाहिए।
क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि:
- बनचौरा में तैनात दोनों नर्सों को तत्काल उनकी मूल तैनाती स्थल पर भेजा जाए (यदि वर्तमान व्यवस्था अस्थायी है तो उसका कारण सार्वजनिक किया जाए)।
- नियुक्त स्थायी चिकित्सक से शीघ्र कार्यभार ग्रहण कराया जाए।
- स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टर और आवश्यक स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
साथ ही, जिलाधिकारी उत्तरकाशी से भी मांग की गई है कि वह इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर वास्तविक स्थिति की जांच करें और सीमांत क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
अब निगाहें सरकार पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ एक स्वास्थ्य केंद्र का नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों के स्वास्थ्य और जीवन का है जो दशगी हातड़ और उपली बिष्ट पट्टी के इस एकमात्र प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री की दहलीज तक पहुंची यह आवाज़ कब तक समाधान में बदलती है।
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