उत्तरकाशी का हजार वर्ष पुराना सूर्य मंदिर समूह बदहाली की कगार पर
उत्तरकाशी। जनपद के भटवाड़ी क्षेत्र में रैथल और क्यारक गांव के बीच स्थित लगभग एक हजार वर्ष पुराना सूर्य मंदिर समूह आज बदहाली और उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग की अनदेखी के चलते यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को खोती जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह सूर्य मंदिर समूह कभी अपनी भव्यता और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध था। जागेश्वर धाम की तर्ज पर बने ये मंदिर पत्थरों से निर्मित हैं और इनकी वास्तुकला प्राचीन इतिहास की झलक प्रस्तुत करती है।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब तीन दशक पहले यहां 12 से 15 छोटे-बड़े मंदिर मौजूद थे। मंदिरों के भीतर पत्थरों पर उकेरी गई देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी गई थीं। इसके अलावा यहां विभिन्न लिपियों में लिखे गए प्राचीन शिलालेख भी मौजूद थे, जो अब धीरे-धीरे गायब हो चुके हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संरक्षण के अभाव में मंदिर समूह खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। समय रहते यदि इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां अपनी इस सांस्कृतिक विरासत से वंचित हो जाएंगी।
ग्रामीणों और क्षेत्रीय लोगों ने सरकार एवं पुरातत्व विभाग से मांग की है कि सूर्य मंदिर समूह के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और ऐतिहासिक महत्व को बचाने के लिए जल्द ठोस कदम उठाए जाएं।
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